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Showing posts from October, 2009

shayari

तेरी ख़ामोशी में भी शिकायत सुने देती है
के यार तेरे आँखों के नूर ने शायर बना दिया

तेरे तसव्वुर में अलफ़ाज़ खो गए ...
महफिल में तेरी तारीफ़ न हो सकी इसमें हमने क्या किया?

farewell poem

ये कहकहे कहेंगे कल की खामोशियों में
की यार कभी वो दिन भी थें

ये महफिलें कहेंगी कल की तनहाइयों में
की यार कभी हम तनहा न थें

ये मिकडे ज्झूम कर्र याद दिलाते रहेंगे कल की मदहोशियों में
की यार कभी हम भी होशमंद थें

माँ

'झा' कर के जब मैं चिप जाता
आँगन में तंगी साडी के पीछे
मुघे दूंद्ती आ जाती वो अँखियाँ मीचे

साडी की झिलमिल ओत से मैं हंस देता
दौड़ कर माँ को नन्हीबाहों में कस लेता
रजा बेटा कह मुघे द्लारती
मुझे गुदगुदा खुद ही हर्षाती

मुझे उठा फिर गोंडी में स्वप्न लोक में लके जाती
स्वप्न लोक में परियां होतिएँ परियों में मैं चिप घबराता
झाल्लाकर्र ओठ जाता
झा करता माँ को बगल में ही पाता

माँ मेरी सौ परियों से सुन्दर
परम पावन उस्सका आँगन
मेरी तीरथ मेरी माता
मेरी मंदिर उसका प्रांगन

मैया मोसे खोई मुरलिया

मैया मोसे खोई मुरलिया
ला दे मोहे नयी मुरलिया
मैया मोसे खोई मुरलिया

जा बैठा जबब यमुना तीरे
चल लागी पवन धीरे धीरे
याद आ गयी धुन वो पुरानी
नांच उठी थी जिसपे राधिका रानी
टूटी थी मैया उस दिन उस्सकी पजनिया
मेह्कन लागी थी जब सुर फुलवरिया
फिसल हाथ से गिरी यमुना जी में मोरी मुरलिया

....
गिरी तोसे जो तोरी मुरलिया
देख तो चल के मोरे लल्ला
यमुना जी ही बनी मुरलिया ...

where is God?

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Growing up in a traditional Indian middle class family, I got to know the same stuff as most of you know and the things that have now so deeply rooted in our thinking that now we don’t even see a scope of questioning them. No, I am not talking about superstition or misunderstanding something, I am talking about our inability to see the seeds when they were being sown (by our parents and society) and the black ribbon around our eyes that disallows us to see the tree that’s standing tall in front of us today.
I remember how my parents would talk to some of our guests cordially and as soon as the guests would leave, they would look so relieved. Yes, it’s a torture to laugh at jokes you don’t like. It’s a torture to throw smiling faces at your guests whose presence disturbs you. It’s a torture to know that the studies of your kids are being affected by the frequent guests, after all, the competition outside is tough. Were they like this when they were kids? Was there no time in their l…