Sunday, January 17, 2010

पापा

पापा आप की स्कूटर पर
आगे खड़े होकर स्कूल जाना

गेट पर खड़े रहना
अन्दर जाने से घबराना

वो भारी बस्ता टांग कन्धों पर
सर झुका टीचर से शर्माना

गले में टाँगे पानी की बोतल
लंच में टिफिन चुराना

पापा तेरे आने तक गेट पर
खुद को फुसलाना बहलाना

याद आ रहा आज सब कुछ
वो स्कूल से कॉलेज तक आना

और आज अचानक इक कंपनी में
यूँ ही placed हो जाना

पापा तेरे कन्धों से उतर आज
मैंने ये माना

ये उचाई कितना कम है, कितना
कठिन है तुझसा कद पाना

खुसी मनाऊं, गाने गाऊँ
या याद करूँ तेरी थाली में खाना ?

पापा मुझे ये सब नही चाहिए
घर से दूर बस नही जाना

मेरी पीड़ा मैं ही जानू
क्या नापेगा कोई पैमाना ?

और इसपर बधाई लगती है मानो
रूठे मन पर ताना

पापा अब क्या कहूँ मैं तुमसे
अब तक बस इतना जाना ....

तेरे बिन नही हूँ कुछ भी
दुःख दे गया नौकरी पाना |

2 comments:

lalit said...

simply awesome.......

myviews said...

its our hard fate that we can't be with our family even after completion of study. You really expressed our feelings.

चल दोबारा ज़िन्दगी से प्यार कर

तू किसी शोख़ का सिंगार कर रख भी दे ये ख़ामोशी उतार कर तीरगी ये पल में टूट जायेगी  चल दोबारा ज़िन्दगी से प्यार कर एक ही नहीं कई शिकायतें ...