Tuesday, January 19, 2010

गीता सार क्या है?

घड़ी की गणना क्या है
समय का बड़ना क्या है
क्या है वर्त्तमान का भूत हो जाना
रवि का उतरना चड़ना क्या है ........१



इन प्रशनो* में तेरा विचरण क्या है
'चक्रेस' ये पागलपन क्या है
क्या है सुबोध संज्ञान का होना
ये मुड़ता अज्ञान क्या है .................२

शून्य में अकेला होना क्या है
कुछ पाकर खो देना क्या है
क्या है अनवरत चलते जाना पथ पर
चलकर कुछ दूर रुक जाना क्या है ..................३

परम सत्य विज्ञान क्या है
चक्रेस गीता कुरान क्या है
क्या है भीड़ में खो जाना
जीवन का संविधान क्या है .................४

कर्म फलों का भार क्या है
नश्वर है तो ये संसार क्या है
क्या है कुरुक्षेत्र मध्य आज 'चक्रेस' का रोना
केशव आज गीता सार क्या है ..................५

2 comments:

lalit said...

bhai really your poems sound like written by a pro keep it up buddy.I remember a song after reading this poem......not kind of related but............ pani gila kyon hai, asaman nila kyon hai.......which had many answered questions but your questions are more thought provoking and unanswered........

Deep Prakash Nishad said...

Title should be renamed to Chakresh Gita Saar because when you say Gita people by default take it as Bhagvat Gita. So although this blog is also gita saar but it is not bhagvat gita saar rather it Chakresh Gita saar. So to avoid confusion and misleading of people title should be renamed.

चल दोबारा ज़िन्दगी से प्यार कर

तू किसी शोख़ का सिंगार कर रख भी दे ये ख़ामोशी उतार कर तीरगी ये पल में टूट जायेगी  चल दोबारा ज़िन्दगी से प्यार कर एक ही नहीं कई शिकायतें ...