Saturday, April 3, 2010

आज होठों पे हैं दिलबर अफसाना तेरा

आज होठों पे हैं दिलबर अफसाना तेरा
रुख से पर्दा हटा तू कहता दीवाना तेरा

रात भर जागना, चाँद से बतियाना
फिर वही गीत हंसकर गुनगुनाना तेरा

अकेले में सजना, गज़रे लगाना
आइना देखना, खुद ही शर्माना तेरा

मेरी राह तकना, आने पे कहना
ऐसे आने से बेहतर था न आना तेरा

नाराज़ हो जाना, रूठ जाना मानना
लड़ना झगड़ना फिर मुस्काना तेरा

चल दोबारा ज़िन्दगी से प्यार कर

तू किसी शोख़ का सिंगार कर रख भी दे ये ख़ामोशी उतार कर तीरगी ये पल में टूट जायेगी  चल दोबारा ज़िन्दगी से प्यार कर एक ही नहीं कई शिकायतें ...