Saturday, May 29, 2010

जीवन एक कविता ही तो ह

जीवन एक कविता ही तो है
और हूँ किसी पंक्ति का एक शब्द मात्र मैं
इन मात्राओं का उन मात्राओं से मेल है जीवन
कुछ छंदों की लय ताल का खेल है जीवन
मैं न होता पर्याय भी कोई मेरा यदि कविता में होता
तो भी अर्थ कविता का शायद लेश मात्र भी न खोता
पर मैं हूँ इन छंदों में क्यूंकि
उन छंदों में साथी तुम हो
लय ताल कविता की हमसे
फिर क्यूँ आज तुम गुमसुम हो ?
जीवन एक कविता ही तो है

6 comments:

संजय भास्कर said...

वाह ! कितनी सुन्दर पंक्तियाँ हैं ... मन मोह लिया

संजय भास्कर said...

सार्थक और बेहद खूबसूरत,प्रभावी,उम्दा रचना है..शुभकामनाएं।

संजय भास्कर said...

तो भी अर्थ कविता का शायद लेश मात्र भी न खोता
पर मैं हूँ इन छंदों में क्यूंकि
उन छंदों में साथी तुम हो
लय ताल कविता की हमसे
फिर क्यूँ आज तुम गुमसुम हो ?
जीवन एक कविता ही तो है

बहुत ही सुंदर .... एक एक पंक्तियों ने मन को छू लिया ...

Chakresh Singh said...

dhanyavaad Sanjay ji

nilesh mathur said...

वाह! क्या बात है! सचमुच जीवन एक कविता ही तो है!
www.mathurnilesh.blogspot.com

अरुण 'मिसिर' said...

अतिसुंदर भाव
प्रसंशनीय प्रस्तुति

चल दोबारा ज़िन्दगी से प्यार कर

तू किसी शोख़ का सिंगार कर रख भी दे ये ख़ामोशी उतार कर तीरगी ये पल में टूट जायेगी  चल दोबारा ज़िन्दगी से प्यार कर एक ही नहीं कई शिकायतें ...