तो सोचा जाए उनसे मिलने की

जख्म भरे तो सोचा जाए उनसे मिलने की
सांस थमे तो सोचा जाए उनसे मिलने की

धागे सारे रिश्तों के मैं उलझा बैठा हूँ
गाँठ खुले तो सोचा जाए उनसे मिलने की

जीवन रुका पड़ा है कबसे उन्ही सवालों पर
बात बढ़े तो सोचा जाए उनसे मिलने की

अब पालनें बाँझन आंखों के सूने रहते हैं
ख्वाब पले तो सोचा जाए उनसे मिलने की

बगिया सूनी है बिन माली फूल नहीं कोई
कँवल खिले तो सोचा जाए उनसे मिलने की

Comments

जीवन रुका पड़ा है कबसे उन्ही सवालों पर ,
बात बढ़े तो सोंचा जाए उनसे मिलने की !

अच्छा लिखा है चक्रेश जी ,
बहुत बधाई आपको !

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