कभी कभी मेरे दिल में ये ख़याल आता है

कभी कभी मेरे दिल में ये ख़याल आता है
के इस एक उम्र के तमाम लम्हे ख़ुशी के हो भी सकते थें
पर ये हो न सका
जिंदगी हर एक राह हर एक मंजिल एक नया सफहा खोलती गयी अलिफ़ लैला की दास्तानों सी
और हर एक हर्फ़ एक नए सफ़र के इशारे लेकर
आता रहा ..... जाता रहा
कभी कभी मेरे दिल में ये ख़याल आता है

Comments

shephali said…
kabhi kabhi dil me ye khayal aata hai :)


bahut sundar

Popular posts from this blog

Sochata hun ke wo (Nusrat Fateh Ali Khan) Translation

The Indian Civilization (A Sequel)

KATHPUTALI(Hindi poem)