Monday, May 23, 2011

वो मैं था

वो मैं था
वो मैं था
जो कहता था उस दिन
के सब कुछ यहाँ का
यहीं पर रहेगा
जो सुनते हो तुम ये
आज मेरी जुबानी
ये कविता कोई और
कल फिर कहेगा

2 comments:

pranay kumar said...

short and sweet... beautiful

shephali said...

sab kuch ek jaisa ni rehta

kal aur aayenge mujhse behtar kehne wale sun ne wale..............
achi prastuti

चल दोबारा ज़िन्दगी से प्यार कर

तू किसी शोख़ का सिंगार कर रख भी दे ये ख़ामोशी उतार कर तीरगी ये पल में टूट जायेगी  चल दोबारा ज़िन्दगी से प्यार कर एक ही नहीं कई शिकायतें ...