अपने ही वादों के, कर्ज़दार हो गए

अपने ही वादों के क़र्ज़दार हो गए
बैठे थे किनारों पे मझधार हो गए

हम ढूंढ रहे अबतक खोयी हुयी हस्ती
जो भूल गए खुद को वो पार हो गए

Comments

Anonymous said…
learned a lot
shephali said…
बहुत कुछ गयी ये दो लाइने :)
kumar said…
waah...kamaal kar diya

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