दिल की तन्हाई इस कदर क्यूँ है

दिल की तन्हाई इस कदर क्यूँ है
मुझसे बेगाना आज घर क्यूँ है ?

याद आता नही मुझे कुछ भी
जाने भीगी सी ये नज़र क्यूँ है

लौट जाना नसीब है इसका
हो रही बावली लहर क्यूँ है

आसमाँ पूछता सितारों से
उनसे महरूम दोपहर क्यूँ है

Comments

रविकर said…
हो रही बावली लहर --

सुंदर कविता, सुंदर भाव।
दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं।
Chakresh said…
thanx sir..aap ko Happy Diwali ...

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