Thursday, April 5, 2012

अच्छा होना समस्या है, गलती नहीं

अच्छा होना समस्या है, गलती नहीं

भीड़ में अकेला महसूस करना मजबूरी है

कमजोरी नहीं

जो हम रुसवा हुए बस्ती बस्ती

कौन कहता है के इज्ज़त हार आये हैं?

के लोगों की बातें दिल-ऐ-शहंशाह को कब हरा पायी हैं

2 comments:

रविकर फैजाबादी said...

बहुत बढ़िया अंदाज |
कम शब्द |
ज्यादा और समझदारी से भरी बात |
शुभकामनायें चक्रेश ||

chakresh singh said...

Thank you sir.

चल दोबारा ज़िन्दगी से प्यार कर

तू किसी शोख़ का सिंगार कर रख भी दे ये ख़ामोशी उतार कर तीरगी ये पल में टूट जायेगी  चल दोबारा ज़िन्दगी से प्यार कर एक ही नहीं कई शिकायतें ...