कहना चाहा बहुत कह न पाया कभी


कहना चाहा बहुत कह न पाया कभी 
और फिर चैन से रह न पाया कभी 
 
कुछ मुलाक़ात में आप क्या हो गए
क्यूँ भला फासले सह न पाया कभी 

अलविदा की घड़ी जैसे थम सी गयी 
वक़्त उससे निकल बह न पाया कभी 




PS: The meter of this Gazal is same as that of the famous gazal in the voice of Jagjit ji: "aap ko dekh kar dekhata reh gaya".

Comments

कल 27/05/2012 को आपकी यह पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
धन्यवाद!
sushila said…
बहुत ही खूबसूरत शेर कहे हैं आपने । बधाई !
expression said…
बहुत सुन्दर......
छोटे बहर की सुंदर गज़ल.....

अनु
chakresh singh said…
शुक्रिया दोस्तों


-ckh-

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