जाने ये लोग


जाने ये लोग कैसे गाते हैं
हम तो हर धुन ही भूल जाते हैं

घर की दीवारें या के आईने
जाने क्यूँ मुझपे मुस्कराते हैं

बेसबब तो नहीं ये उनके ग़म
कुछ तो है आज भी सताते हैं

ख़त वो लिखते ज़रूर होगें पर
नामाबर ही इधर न आते हैं

शाम आई कई सवालों संग
फिर से हम घर को लौट जाते हैं

-ckh

Comments

expression said…
वाह..
बहुत सुन्दर......

अनु

Popular posts from this blog

Sochata hun ke wo (Nusrat Fateh Ali Khan) Translation

The Indian Civilization (A Sequel)

KATHPUTALI(Hindi poem)