हर रूप में तुमको देख लिया


हर रूप में तुमको देख लिया
हर रूप तुम्हारा प्यारा है
मैं फिर गुस्ताखी कर बैठा
कागज़ पर हुस्न उतारा है

दिल को बहलाकर देख लिया
तुमसे न कह कर देख लिया
मैं भूल गया था पहला प्यार
तुमसे ही प्यार दोबारा है

चाहा था कहना मंदिर में
पर सोच रहा था अपने गम
मेरी नैया मझधार प्रिये
दूर कहीं पे किनारा है

मैं आज भी अक्सर जाता हूँ
उस मंदिर तक, उन झूलों तक
वो मीठी हँसी भोली बातें
यादों में ऐसे संवारा है

कुछ न कहना गर हैराँ हो
मेरे दिल की इस कविता पर
मैं तन्हा तन्हा जी लूँगा
काफी इतना भी सहारा था

जाते जाते इक आखिरी बार
मेरे हमदम मुझसे मिल लो
मैं जानता हूँ इस जीवन में
इतना ही साथ हमारा है

-ckh


Comments

expression said…
वाह चक्रेश....
बहुत बढ़िया..
दिल को बहलाकर देख लिया
तुमसे न कह कर देख लिया
मैं भूल गया था पहला प्यार
तुमसे ही प्यार दोबारा है..........

बेहद सुन्दर!!!
अनु
उत्कृष्ट प्रस्तुति बुधवार के चर्चा मंच पर ।।

Popular posts from this blog

Sochata hun ke wo (Nusrat Fateh Ali Khan) Translation

The Indian Civilization (A Sequel)

KATHPUTALI(Hindi poem)