Friday, December 28, 2012

ठहरा कहाँ हूँ मैं


ठहरा कहाँ हूँ मैं मौज-ओ- हवा हूँ 
मुझे रोज़ मिलती हैं ढेरों विदायें 

हर देश में मेरे अपने कई हैं 
मौसम बदलते ही मुझे भूल जायें 

गाँवों की निबिया गुडिया की शादी  
शहरों के सर्चस क्या क्या बतायें ?

मंदिर की घंटी गिरिजा का लंगर 
मस्जिद की सीड़ी सब याद आयें 

हिन्दू कोई है, कोई है मुसलिम 
क्या जाने बुत ये किसने बनायें ?


-ckh

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तू किसी शोख़ का सिंगार कर रख भी दे ये ख़ामोशी उतार कर तीरगी ये पल में टूट जायेगी  चल दोबारा ज़िन्दगी से प्यार कर एक ही नहीं कई शिकायतें ...