Saturday, July 6, 2013

मेरे वादे पे ऐतबार नहीं

मेरे वादे पे ऐतबार नहीं 
साफ़ कह दे के मुझसे प्यार नहीं 

गैर लगाने लगीं सभी गलियाँ 
अब यहाँ कोई रिश्तेदार नहीं 

मॉफ कर दे जो दर्द होता हो 
मेरे दिल को मगर करार नहीं 

मंदिरों में न हो तो पत्थर है 
ना लिखूं तो तु गुल-ओ-बहार नहीं 


छू के रंगीनीयत अता कर दीं 
ऐ सनम तू शुक्रगुज़ार नहीं 
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mere waade pe aitbaar nahi,
saaf keh de ke mujhse pyaar nahi.....

gair lagne lagee.N sabhi galiyaa.N,
ab yaahaa.N koi rishtedaar nahi...

muaf kar de agar dard hota ho,
mere dil ko magar karaar nahi....

mandiro.N me na ho to patthar hai,
na likhoo.N to tu gul-o-bahaar nahi...

chho ke rangeeniyat ata kar dee.N,
ae sanam tu shukraguzaar nahi?

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