Wednesday, October 26, 2011

बात नज़रों की जुबानी होगी

=.== . /.=.==
बात नज़रों की/ जुबानी होगी,
आपतक कब ये कहानी होगी

जो खुदा आज तलक रूठा है
कोई देवी ही/// मनानी होगी

आरज़ू क्या है न जानूँ मैं भी
दिल तुझी को बतानी होगी

छू गया आप का तस्सवुर जो
अब हँसी भी तो छुपानी होगी,

हाय!!! 'चक्रेश' ये कलम तेरी
जाने किस रोज़ रूमानी होगी

1 comment:

रविकर said...

एक साल की बिटिया रानी, चल खुशियाँ संग मना
होगी बात जुबानी अब तो, नज़रों से नहीं सुना
एक दिवाली ऐसी भी थी, जब गया गरीब धुना
कभी न आती घर में मेरे, चल इक प्रोग्राम बना

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तू किसी शोख़ का सिंगार कर रख भी दे ये ख़ामोशी उतार कर तीरगी ये पल में टूट जायेगी  चल दोबारा ज़िन्दगी से प्यार कर एक ही नहीं कई शिकायतें ...