ज़िन्दगी तुने मुझे ये आज क्या सिखला दिया
सैकड़ों तिमिरों के आगे उजाला दिखला दिया
मैं निर्बोध अबोध बालक निराश ना हताश था
तुने खुद ही दीप नयी आशाओं का जला दिया
क्या नहीं कर लूं अगर मैं ठान लूं करने की तो
भूल गया था अपना तेज़ मैं तुने याद दिला दिया
देखता रह दूर से अब बड़ चलें मेरे कदम
ऐ निराशाओं के सागर तुझको मैंने भुला दिया
2 comments:
दीपावली के इस पावन पर्व पर ढेर सारी शुभकामनाएं
बहुत बढ़िया!
सुख औ’ समृद्धि आपके अंगना झिलमिलाएँ,
दीपक अमन के चारों दिशाओं में जगमगाएँ
खुशियाँ आपके द्वार पर आकर खुशी मनाएँ..
दीपावली पर्व की आपको ढेरों मंगलकामनाएँ!
-समीर लाल 'समीर'
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