Sunday, April 11, 2010

सृष्टी एक अनंत रचना

सृष्टी एक अनंत रचना
विधाता की दैवीय रचना

पात्र जिसके तुम हो हम हैं
विवरण में जिसके शब्द कम हैं
विधाता के कर कमलों की महिमा
काल पृष्टों पर अंकित ये रचना

नदी की लय ताल देखो
व्योम वो ये पाताल देखो
जीवन का संचार जिसमे
ऐसी अद्भुत विस्तृत ये रचना

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चल दोबारा ज़िन्दगी से प्यार कर

तू किसी शोख़ का सिंगार कर रख भी दे ये ख़ामोशी उतार कर तीरगी ये पल में टूट जायेगी  चल दोबारा ज़िन्दगी से प्यार कर एक ही नहीं कई शिकायतें ...