Wednesday, April 14, 2010

ये जिंदगी by Sanjay Bhaskar

ये जिंदगी भी न जाने कितने मोड़ लेती है
हर मोड़ पर नया सवाल दे देती है
ढूंढते रहते है हम जवाब जिंदगी भर
जवाब मिल जाते है तो
जिंदगी सवाल बदल देती है |




http://sanjaybhaskar.blogspot.com/

3 comments:

संजय भास्कर said...

सचमुच ये जिंदगी न जाने कितने मोड लेती है. लाजवाब कविता!

संजय भास्कर said...

DHANYAWAAD AAPKA MERI KAVITA KO BLOG ME JAGAH DENE KE LIYE.

कविता रावत said...

esi ke naam jindagi hai...
ab kisko kathin aur kisko saral raah mile, kuch nahi kaha jaa sakta..
badiya rachna..
Haardik shubhkamnayen!

चल दोबारा ज़िन्दगी से प्यार कर

तू किसी शोख़ का सिंगार कर रख भी दे ये ख़ामोशी उतार कर तीरगी ये पल में टूट जायेगी  चल दोबारा ज़िन्दगी से प्यार कर एक ही नहीं कई शिकायतें ...