गिनती है सांस जिंदगी पल पल उधार है
हमपे भी कर-गुजरने की कुछ ज़िद सवार है
बारिश में भीगते रहे बेरोक टोक हम
उनको तो छींक आ रही हमको बुखार है
दिल में रही खलिश जो था इक तीर-ऐ-नीमकश
अफ़सोस अब यही के वो भी आर पार है
अंतिम दिन जीवन के यदि ये
पीर हृदय की रह जाए
के दौड़-धूप में बीत गए पल
प्रियतम से कुछ ना कह पाएँ
यूँही नहीं तुम्हारा नाम… लेते हैं आज भी कुछ है जो ज़िंदगी तमाम मुझको ना दे सकी एक प्यास थी सो रह गई एक ज़ख़्म जो भरा नहीं उम्मीद थी के ...
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