मौसम-मौसम बढ़ता जाए

मौसम-मौसम बढ़ता जाए 
जीवन का रंग चढ़ता जाए 

केशव खोलें सारी गाठें
अर्जुन गीता पढ़ता जाए 

कुंडली में रख रहू केतु को 
भाग्य, देवता मढ़ता जाए 

मद्धम-मद्धम गिनता सासें 
कोई कविता गढ़ता जाए

-ckh

Comments

expression said…
beautiful.........
loved every word of it.....

anu
बढ़िया है भाई जी ||
Anjani Kumar said…
bahut sundar dost..

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