Friday, May 11, 2012

तू न आया न तेरा सलाम आया

तू न आया न तेरा सलाम आया
चिट्ठियाँ ना लिखीं ना पयाम आया

हंस के बोला करो खिलखिलाया करो
आज उसका कहा कुछ तो काम आया

छिड़ गयी जो कहानी पुरानी तो फिर
याद मुझको वो बचपन तमाम आया

आज सारा शहर देख आया हूँ मैं
याद फिर भी अभी तक न नाम आया

सर्द रातों में मुझको जलाते हैं वो
जीतेजी ना सही मर के काम आया

लो ग़ज़ल हो गयी ताज़ी ताज़ी कोई
मेरे जानिब जो चलकर के जाम आया

meter:
२१२ २१२ २१२ १२२

-ckh-

2 comments:

रविकर फैजाबादी said...

सुन्दर प्रस्तुति |
आभार ||

expression said...

वाह...................

बहुत बढ़िया...

अनु

चल दोबारा ज़िन्दगी से प्यार कर

तू किसी शोख़ का सिंगार कर रख भी दे ये ख़ामोशी उतार कर तीरगी ये पल में टूट जायेगी  चल दोबारा ज़िन्दगी से प्यार कर एक ही नहीं कई शिकायतें ...