हम दुकान सजाते रहे और बाज़ार उठ गया,

हम दुकान सजाते रहे और बाज़ार उठ गया,
कुछ सामान दिखाते रहे और खरीदार उठ गया ;

हाथ पकड़ के हमने उसे बिठाया बार बार,
हाथ झटक के वो मेरा, बार बार उठ गया ;

कोतवालों ने किया घर नीलाम कुछ ऐसे ,
रूठ कर हिस्से से अपने, हकदार उठ गया ;

डूबकर उसकी ग़ज़ल में खोएं इस कदर ,
जागने से पहले ही वो फनकार उठ गया ;

Comments

Dev said…
डूबकर उसकी ग़ज़ल में खोएं इस कदर ,
जागने से पहले ही वो फनकार उठ गया ;
बहुत खूब
शुक्रवार के मंच पर, लाया प्रस्तुति खींच |
चर्चा करने के लिए, आजा आँखे मीच ||
स्वागत है-

charchamanch.blogspot.com

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