जिंदगी ने हमे तो था गम सब दिया
हंसाते रहे तुम सोचने कब दिया
हर नए शेर की तुम पहचान हो
शायरी का है तुमने नया ढब दिया
जिस गली में हारे अपनी खुदी
देने वाले ने हमको वहीं रब दिया
आँचल के कोने में लपेटें वो उंगली
कब साँसें रूकीं गिरेह कब दिया
बाग़ का हर फूल मेहरबान तुम्हारा
खिलने का कलि को तुमने सबब दिया
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