अंतिम दिन जीवन के यदि ये
पीर हृदय की रह जाए
के दौड़-धूप में बीत गए पल
प्रियतम से कुछ ना कह पाएँ
Thursday, March 4, 2010
कल नए फूल लगा दूंगा
शाम हुई घर लौट आया मैं मेरी राह ताकते थक गए गुल गुल्दाम के सूख कर बेजान हो चुके सारे... मेरे प्यारे फूल सारे निकाल फेंकता हूँ पुराने फूलों को कल नए फूल लगा दूंगा कल नए फूल लगा दूंगा
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